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भविष्य की कसोटी

आज हम जानेंगे की भविष्य का निर्धारण कैसे करे | आज-कल हर माता-पिता को बच्चे के भविष्य की चिंता रहती है, समय के साथ जरुरी भी है चिंता परन्तु कुछ माता-पिता स्वयं के सपने को अपने बच्चे का सपना मान लेते है उदाहरण के लिए मेरा बच्चा बड़ा होकर डॉक्टर बनेगा, इंजिनियर बनेगा आदि |

परन्तु बच्चो का भी सपना होता है कि वह बड़ा होकर एक्टर बने, कुछ का सपना होता है इसरो में साइंटिस्ट बने लेकिन बच्चे अपना सपना छोड़ दुसरो के सपने पुरे करने में लग जाता है |

⇒नई पीढ़ी अब केवल प्रतिशत के लिए भागती है कि मेरे प्रतिशत 90 आ गए तो दिल्ली यूनिवर्सिटी में सिलेक्शन हो जाएगा, नही आए तो क्या होगा |
⇒कुछ बच्चे नीट परीक्षा की तैयारी हेतु कोटा जाते है | परीक्षा में चयन ना होने पर पुरे भारत में लगभग सेकड़ो छात्र गलत कदम उठाते है |

कुछ विद्यार्थी अपनी क्षमताओं को ना देखकर अपने साथियों के साथ रहने की सोचते है और स्वयं के भविष्य का ना सोचकर विषय का चयन गलत ले लेते है या कभी वो ऐसे व्यक्ति से सुझाव लेते है जिन्हें अन्य विषयों की समझ नही है |

बच्चो आप अपनी क्षमताओं को देखिये और उन्ही कोर्स का चयन कीजिये तांकि आप जब किसी जॉब को करे तो वो आपकी मनपसंद फील्ड की होगी,आपको वह काम आनंदित लगेगा,आप ख़ुशी से कार्य में मन लगाकर मेहनत करेंगे |

सही चुनाव ही जीवन के लक्ष्य तय करता है - राहुल व्यास